एनीमिया क्या हैं I


 रक्त में हीमोग्लोबिन की कमी को एनीमिया कहा जाता है एनीमिया रक्त में पाया जाने वाला वह पदार्थ है जो ऑक्सीजन को शरीर में लेकर जाता है एवं विभिन्न अंगों तक पहुंचाता है जो शरीर की विभिन्न क्रियाओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है स्वास्थ्य केंद्र पर लैब टेक्नीशियन द्वारा की जाने वाली रक्त की एक साधारण जांच से हिमोग्लोबिन की मात्रा का पता लगाया जा सकता है हिमोग्लोबिन के कम होने से गर्भवती महिलाओं को जटिलता हो सकती है और इसके फल स्वरूप मां और बच्चे की मृत्यु तक हो सकती है इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है और इससे बच्चों का शारीरिक विकास रुक सकता है गंभीर खून की कमी या एनीमिया के लक्षण निम्नलिखित होते हैं

 पहला है एनीमिया से पीड़ित महिला का रंग पीला पड़ जाता है जीभ सफेद हो जाती है 



दूसरा है थकान और कमजोरी महसूस होती है जिससे रोजमर्रा के कामकाज करते समय सांस लेने में कठिनाई महसूस होती है 


तीसरा चेहरे और शरीर में सूजन हो सकती है 



यदि रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम पर लीटर से अधिक है तो यह हिमोग्लोबिन का सामान्य स्तर है और यदि हीमोग्लोबिन का स्तर 7 ग्राम से 11 ग्राम पर डीएल है तो यह खून की कमी है और हिमोग्लोबिन 7 ग्राम पर डीएल से कम है तो यह गंभीर खून की कमी को दर्शाता है यदि गर्भवती महिला में हीमोग्लोबिन का स्तर 11 ग्राम से अधिक है तो उसे 3 महीने बाद लगातार छह माह तक आयरन की गोली रोज खिलानी चाहिए इससे प्रसव के दौरान होने वाली किसी भी प्रकार की जटिलता के उत्पन्न होने का खतरा नहीं होता और परसों बाद भी 6 माह तक इस महिला को एक गोली आयरन की रोज खिलाते रहे इससे उसका स्वास्थ्य ठीक रहेगा और प्रसव के बाद भी खून की कमी नहीं होगी क्योंकि फसल के दौरान अधिक खून जाने से महिलाओं में खून की कमी हो जाया करती है यदि महिला में खून की कमी का स्तर 7 ग्राम से 11 ग्राम के बीच हो तो महिला को 6 माह तक दो गोली आयरन की खिलानी चाहिए इसके साथ ही आयरन सुक्रोज के इंजेक्शन द्वारा भी खून की कमी को पूरा किया जा सकता है और प्रत्येक में खून की जांच भी करवाते रहें जिससे कि एनीमिया की प्रगति का पता लगाया जा सके यदि हीमोग्लोबिन का स्तर 7 ग्राम से कम हो तो ऐसी स्थिति में महिला को अस्पताल में भर्ती करा कर खून चढ़ाना चाहिए वह लगातार चिकित्सक की निगरानी में अपना उपचार करवाना जरूरी होता है इसके साथ ही सभी गर्भवती महिलाओं को लौह तत्वों से युक्त भोजन जैसे कि हरे पत्तेदार सब्जियां साबुत दालें रागी गुड मांस और कलेजी इत्यादि तथा विटामिन सी से भरपूर फल जैसे आम अमरूद संतरा मौसमी और नींबू का सेवन अधिक मात्रा में करना चाहिए इससे शरीर में लौह तत्वों का पाचन अधिक मात्रा में होता है 



आयरन की गोलियां महिलाओं को नियमित रूप से विशेषकर सुबह खाली पेट खानी चाहिए यदि खोल यदि गोली खाने से पेट में दर्द हो तो या मितली आए तो वह इन्हें खाद खाना खाने के साथ या रात को सोने से पहले खा सकती है 




ऐसा करने से मिली नहीं आएगी कुछ महिलाएं आयरन की गोलियां नियमित रूप से नहीं खाती क्योंकि इन्हें खाने से कुछ सामान्य से प्रभाव होते हैं जिससे मितली आना कब जाना या काला मल आना तो इनसे घबराना नहीं चाहिए यह सामान्य बात है कब्ज होने पर महिलाओं को अधिक मात्रा में पानी पीना चाहिए और रेशेदार भोजन जैसे हरे पत्तेदार सब्जियां खानी चाहिए आयरन की गोलियां चाय पी या कैल्शियम की गोली नहीं खानी चाहिए ऐसा करने से शरीर में आयरन कम हो जाता है इसके साथ ही कैल्शियम और आयरन की गोली खाते समय 1 घंटे का अंतराल होना चाहिए आयरन की गोली खाने से पहले से कम थकान महसूस होगी किंतु स्वस्थ महसूस करने के बावजूद की गोली बंद नहीं करनी चाहिए आयरन की गोलियां सभी चिकित्सा संस्थानों पर निशुल्क मिलती है बच्चों को स्कूल आंगनबाड़ी केंद्रों में लाई जाती है हमें नहीं चाहिए आपके और आपके बच्चों के विकास के लिए यह बहुत जरूरी है

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